मानव इतिहास को विभिन्न युगों में विभाजित किया गया है, जिनमें पाषाण युग (Stone Age) सबसे प्राचीन है। यह युग तीन भागों में बाँटा जाता है—
1. पुरापाषाण युग के औजारों की विशेषताएँ
समयकाल: लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक
पुरापाषाण युग के औजारों को पहचानना आसान है क्योंकि ये बहुत सरल, असमान और बिना चमकाए हुए होते थे। यह वह समय था जब मानव पूरी तरह से शिकारी और खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherer) था।
पुरापाषाण युग के औजारों की मुख्य विशेषताएँ:
• ये अनगढ़ और असमान होते थे, क्योंकि इन्हें पत्थरों को तोड़कर सीधे उपयोग में लाया जाता था।
• मुख्य रूप से क्वार्टजाइट, चर्ट, फ्लिंट और बेसाल्ट जैसे कठोर पत्थरों का उपयोग किया जाता था।
• औजार भारी और बड़े होते थे, क्योंकि इन्हें सीधे पकड़कर उपयोग किया जाता था।
• इन औजारों का उपयोग शिकार, मांस काटने, लकड़ी तोड़ने और हड्डियाँ तोड़ने में किया जाता था।
• ये औजार मुख्य रूप से हाथ के उपयोग के लिए बनाए जाते थे (Hand Tools)।
पुरापाषाण युग के प्रमुख औजार:
हैंड ऐक्स (Hand Axe) – पेड़ काटने और जानवरों की खाल निकालने के लिए।
चॉपर (Chopper) – पत्थर का एक टुकड़ा, जो एक ओर से धारदार होता था।
स्क्रेपर (Scraper) – चमड़ा छीलने और हड्डियों को तोड़ने के लिए।
फ्लेक टूल्स (Flake Tools) – पत्थर के छोटे-छोटे धारदार टुकड़े, जो विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते थे।
स्पीयर (Spear) – शिकार के लिए नुकीले पत्थर से बनी भाला जैसी संरचना।
2. नवपाषाण युग के औजारों की विशेषताएँ
समयकाल: लगभग 9000 ईसा पूर्व से 2000 ईसा पूर्व तक
नवपाषाण युग में मानव ने खेती और पशुपालन करना शुरू कर दिया था। इस कारण औजारों का विकास हुआ और अधिक उन्नत एवं परिष्कृत औजार बनाए गए।
नवपाषाण युग के औजारों की मुख्य विशेषताएँ:
• ये अधिक चिकने, छोटे और धारदार होते थे।
• औजारों को बनाने और आकार देने की कला विकसित हुई।
• पत्थरों को घिसकर औजारों को धारदार बनाया जाता था।
• कुछ औजारों को लकड़ी के हैंडल से जोड़ा गया, जिससे इन्हें पकड़ना और उपयोग करना आसान हो गया।
• खेती और पशुपालन की शुरुआत के कारण दरांती, कुदाल, हंसिया, और चाकू जैसे औजार विकसित हुए।
• मिट्टी के बर्तन बनाने की शुरुआत भी इसी युग में हुई।
• नवपाषाण काल में कुछ औजारों को धातुओं के साथ जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू हुई।
नवपाषाण युग के प्रमुख औजार:
दरांती (Sickle) – फसल काटने के लिए।
कुल्हाड़ी (Axe) – पेड़ काटने और लकड़ी के काम के लिए।
छेनी (Chisel) – लकड़ी और हड्डी पर नक्काशी के लिए।
मूसल और ओखली (Mortar & Pestle) – अनाज पीसने के लिए।
हथौड़ा पत्थर (Hammer Stone) – हथियार और औजार बनाने के लिए।
बाण और भाला (Arrow & Spear) – शिकार और रक्षा के लिए।
3. पुरापाषाण युग और नवपाषाण युग के औजारों के बीच मुख्य अंतर
विशेषता | पुरापाषाण युग के औजार | नवपाषाण युग के औजार |
संरचना | अनगढ़, असमान और खुरदरे | चिकने, छोटे और धारदार |
बनाने की विधि | पत्थरों को सीधे तोड़कर बनाया जाता था | पत्थरों को घिसकर और धार देकर बनाया जाता था |
उपयोग | शिकार, लकड़ी काटना, मांस काटना | खेती, निर्माण, बर्तन बनाना, पशुपालन |
सामग्री | क्वार्टजाइट, चर्ट, फ्लिंट | घिसे हुए पत्थर, लकड़ी, हड्डी और धातु |
हथियारों की उन्नति | भाले, चॉपर, स्क्रेपर | कुल्हाड़ी, दरांती, चाकू, हथौड़ा |
मानव जीवन का तरीका | शिकारी और खाद्य संग्राहक | कृषक और पशुपालक |
निष्कर्ष
पुरापाषाण युग और नवपाषाण युग के औजारों में काफी अंतर था, जो उस समय के मानव जीवनशैली और तकनीकी विकास को दर्शाता है।
• पुरापाषाण युग में औजार केवल शिकार और जीविका के लिए होते थे, जबकि
• नवपाषाण युग में औजारों का उपयोग खेती, निर्माण, और दैनिक जीवन के अन्य कार्यों में भी होने लगा।
नवपाषाण युग के औजारों की उन्नति ने मानव सभ्यता को कृषि और समाज के विकास की ओर अग्रसर किया। यह विकास धीरे-धीरे कांस्य युग और फिर लौह युग में परिवर्तित हुआ, जिससे आधुनिक मानव सभ्यता की नींव पड़ी।
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