मुगल प्रशासन की प्रकृति: एक विस्तृत विश्लेषण
1. मुगल प्रशासन की केंद्रीय विशेषताएँ
(क) केंद्रीकृत राजतंत्र
-
मुगल शासन एक संपूर्ण केंद्रीकृत राजतंत्र था, जिसमें राजा (पदशाह) सर्वोच्च शासक होता था।
-
शासक की सत्ता ईश्वर-प्रदत्त मानी जाती थी और वह प्रशासन, न्याय, सेना और राजस्व प्रणाली का प्रमुख होता था।
-
मुगल बादशाहों का प्रशासनिक ढाँचा इस्लामी और हिंदू परंपराओं का मिश्रण था, जिससे उन्होंने विविध सांस्कृतिक समुदायों को अपने शासन में शामिल किया।
(ख) दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास
-
दीवान-ए-आम: यह सार्वजनिक दरबार था, जहाँ राजा जनता की समस्याएँ सुनता था।
-
दीवान-ए-खास: यह निजी दरबार था, जहाँ महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सैन्य मामलों पर मंत्रणा होती थी।
2. प्रशासनिक संरचना
(क) शासक (बादशाह) की भूमिका
-
मुगल सम्राट शासन का केंद्र बिंदु था और सभी प्रशासनिक शक्तियाँ उसी में निहित थीं।
-
वह सर्वोच्च सैन्य प्रमुख, न्यायाधीश और कराधान का नियंत्रक था।
-
प्रशासनिक प्रणाली फारसी परंपराओं से प्रभावित थी, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के अनुसार उसमें बदलाव किए गए।
(ख) मंत्रिपरिषद (केन्द्रीय प्रशासन)
मुगल शासन में विभिन्न उच्च अधिकारी और मंत्रियों की एक परिषद थी, जो शासन चलाने में मदद करती थी। इसके प्रमुख सदस्य थे:
-
वज़ीर (प्रधान मंत्री) – यह वित्त और प्रशासन का प्रमुख होता था।
-
मीर बख्शी (सैन्य प्रमुख) – सेना की नियुक्तियाँ, वेतन और युद्ध संचालन का प्रबंधन करता था।
-
सदर-ए-सुदूर – यह धार्मिक और न्यायिक मामलों का प्रमुख था।
-
दीवान-ए-अला – यह वित्त मंत्री था, जो राजस्व संग्रह और बजट की देखरेख करता था।
-
खान-ए-सामा – शाही महल और भंडारण का प्रमुख होता था।
3. प्रांतीय प्रशासन (सबाह प्रणाली)
अकबर के समय सूबा प्रणाली लागू की गई, जिसके तहत साम्राज्य को प्रांतों में बाँटा गया।
(क) सूबा (प्रांत)
-
साम्राज्य को कई सूबों में विभाजित किया गया था।
-
प्रत्येक सूबे का प्रमुख सूबेदार होता था, जो प्रांत का सैन्य और नागरिक प्रशासन देखता था।
-
सूबेदार को वज़ीर और दीवान की सहायता मिलती थी।
(ख) सरकार (ज़िला स्तर)
-
प्रत्येक सूबे को सरकारों में बाँटा गया, जिनका प्रमुख फौजदार होता था।
-
फौजदार कानून व्यवस्था बनाए रखने और कर संग्रह का कार्य करता था।
(ग) परगना (तहसील स्तर)
-
प्रत्येक सरकार कई परगनों में विभाजित थी।
-
परगने का प्रमुख अधिकारी शिकदार होता था, जो कर वसूलता और प्रशासन संभालता था।
(घ) ग्राम प्रशासन
-
गाँवों का प्रशासन स्थानीय मुखिया मुक़द्दम और पटवारी के हाथ में होता था।
4. राजस्व प्रणाली
(क) अकबर की ज़ब्ती प्रणाली
-
ज़ब्ती प्रणाली टोडरमल द्वारा विकसित की गई, जिसे दहसाला प्रणाली भी कहा जाता है।
-
भूमि की नाप-जोख कर उसकी उपज के आधार पर कर तय किया जाता था।
(ख) अन्य राजस्व प्रणालियाँ
-
गल्ला बख्शी: फसल का एक हिस्सा सरकार को दिया जाता था।
-
निजामत प्रणाली: राजस्व और सैन्य सेवाओं को जोड़कर अधिकारियों को जागीरें दी जाती थीं।
5. न्याय व्यवस्था
(क) राजा सर्वोच्च न्यायाधीश
-
मुगल शासक न्याय का सर्वोच्च स्रोत होता था।
-
दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई होती थी।
(ख) काज़ी और मुंसिफ
-
न्यायिक कार्यों के लिए काज़ी और स्थानीय स्तर पर मुंसिफ होते थे।
-
इस्लामी कानून (शरीयत) का पालन किया जाता था, लेकिन हिंदू मामलों में स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखा जाता था।
6. सैन्य प्रशासन (मनसबदारी प्रणाली)
(क) मनसबदारी प्रणाली की विशेषताएँ
-
यह प्रणाली अकबर ने लागू की, जिसमें हर अधिकारी को मनसब (पद) दिया जाता था।
-
मनसबदारों को ज़ात (व्यक्तिगत सैनिकों की संख्या) और सवार (घुड़सवारों की संख्या) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था।
-
मनसबदारों को जागीरें दी जाती थीं, जिनसे वे राजस्व वसूलते थे और सेना रखते थे।
7. धर्म और प्रशासन
(क) धार्मिक सहिष्णुता
-
अकबर ने सुलह-ए-कुल नीति अपनाई, जिससे सभी धर्मों को समानता दी गई।
-
औरंगज़ेब के समय कट्टर इस्लामी नीतियाँ लागू की गईं, जिससे हिंदू शासकों और प्रजा में असंतोष बढ़ा।
8. प्रशासन का पतन और निष्कर्ष
(क) पतन के कारण
-
मनसबदारी प्रणाली में भ्रष्टाचार बढ़ गया।
-
प्रांतीय स्वायत्तता के कारण केंद्रीकृत सत्ता कमजोर हुई।
-
औरंगज़ेब की नीतियों से साम्राज्य में विद्रोह बढ़े।
-
मराठा, सिख, जाट और अन्य स्थानीय शक्तियों का उदय हुआ।
0 टिप्पणियाँ