सातवाहन साम्राज्य की अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा
1. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था
सातवाहन साम्राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित थी। कृषि उत्पादों की विविधता और सिंचाई व्यवस्था ने इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी।
मुख्य बिंदु:
• कृषि उत्पाद: धान, ज्वार, बाजरा, गेहूं, दालें, तिलहन और कपास जैसी फसलें उगाई जाती थीं।
• सिंचाई प्रणाली: सिंचाई के लिए जलाशयों, नहरों और तालाबों का निर्माण किया गया।
2. व्यापार और वाणिज्य का उत्कर्ष
सातवाहन काल में व्यापार अत्यंत विकसित था और इस साम्राज्य के व्यापारिक संबंध न केवल भारत के विभिन्न हिस्सों में बल्कि विदेशी देशों तक भी फैले हुए थे।
आंतरिक व्यापार:
• सातवाहन साम्राज्य में स्थानीय बाजारों (अट्टवी, पत्तन) और व्यापारिक मार्गों का विस्तार हुआ।
• कपड़ा, धातु के बर्तन, मिट्टी के बर्तन और आभूषणों का व्यापक रूप से उत्पादन और बिक्री की जाती थी।विदेशी व्यापार:
• सातवाहनों के समुद्री व्यापार संबंध मुख्य रूप से रोम, अरब, मिस्र और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ थे।
• प्रमुख निर्यात वस्तुएँ काली मिर्च, हाथी दांत, मसाले, मोती, रेशम और कपास थीं।3. सिक्का प्रणाली एवं मुद्रा का प्रचलन
सातवाहन साम्राज्य में सुव्यवस्थित मुद्रा प्रणाली थी, जो आर्थिक लेन-देन में सहायक सिद्ध हुई।
सातवाहन मुद्राएँ:
• सातवाहन शासकों ने सोने, चाँदी, तांबे और सीसे से बने सिक्के जारी किए।
• इनके सिक्कों पर हाथी, बैल, जहाज, पहाड़ और चंद्रमा जैसे प्रतीकों का अंकन किया जाता था।4. कर एवं राजस्व प्रणाली
सातवाहन काल में कराधान प्रणाली सुव्यवस्थित थी, जो राज्य की आय का प्रमुख स्रोत थी।
मुख्य कर:
• भू-राजस्व (भूमिकर): किसानों को कृषि उत्पादन पर कर देना पड़ता था, जो उपज का लगभग छठा हिस्सा होता था।
• व्यापार कर: व्यापारियों से उनके व्यापारिक गतिविधियों के अनुसार कर वसूला जाता था।संपत्ति कर: कुछ मामलों में संपत्ति धारकों से कर लिया जाता था।
5. शिल्प और उद्योग का विकास
सातवाहन काल में विभिन्न उद्योगों और शिल्पों का विकास हुआ, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
मुख्य उद्योग:
• कपड़ा उद्योग: सातवाहन काल में वस्त्र उत्पादन अत्यधिक विकसित था। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के क्षेत्र सूती वस्त्र निर्माण के लिए प्रसिद्ध थे।
• धातु उद्योग: तांबा, लोहा, सीसा और चाँदी के धातु उद्योग फले-फूले।• मृद्भांड (मिट्टी के बर्तन): ब्लैक एंड रेड वेयर (Black and Red Ware) नामक बर्तन निर्माण की तकनीक प्रचलित थी।
• हाथी दांत एवं आभूषण उद्योग: इस समय में सोने, चाँदी और कीमती पत्थरों से आभूषण बनाए जाते थे।
6. सामाजिक और धार्मिक प्रभावों का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सातवाहन काल में अर्थव्यवस्था पर सामाजिक और धार्मिक कारकों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।
मुख्य प्रभाव:
• सातवाहन शासक ब्राह्मणवाद और बौद्ध धर्म दोनों को संरक्षण देते थे।
• बौद्ध धर्म के विकास के कारण स्तूप, विहार और चैत्य जैसे निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिला, जिससे शिल्पकारों और मजदूरों को रोजगार मिला।
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